जैविक किसान का पद्मश्री से सम्मान पर टिड्डी नियंत्रण के उन के उपायों की अनदेखी

हाल ही में टिड्डी नियंत्रण के लिए उठाये उपायों बाबत एक प्रेस नोट के अनुसार भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर ज़हरीले कीटनाशकों के हवाई छिड़काव की अपनी क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है. कुदरती खेती अभियान के सलाहकार प्रो राजेन्द्र चौधरी ने भारत एवं हरियाणा सरकार के कृषि मंत्रियों एवं कृषि सचिवों को लिखे पत्र में इस बात पर निराशा जताई है कि

कीटनाशकों के हवाई छिड़काव के जानेमाने दुष्प्रभावों के बावजूद, सरकार की टिड्डी नियंत्रण नीति एक सूत्री है एवं अन्य उपायों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है. देश विदेश के विशेषज्ञों, जिन में इसी वर्ष पद्मश्री से सम्मानित तेलंगाना के जैविक किसान चिंताला वेंकट रेड्डी भी शामिल हैं, द्वारा कई ऐसे गैर-रासायनिक उपाय सुझाएँ गए हैं जिन से बिना गंभीर दुष्प्रभावों के टिड्डियों को नियंत्रित किया जा सकता है.

प्रोफेसर राजेन्द्र चौधरी

प्रो चौधरी ने सन्दर्भ स्रोतों सहित इन सुरक्षित एवं प्रभावी उपायों की सूची उपलब्ध कराते हुए सरकार से यह अनुरोध किया है कि सरकार रासायनिक उपायों को छोड़ कर इन जैविक/गैर-रासायनिक उपायों के माध्यम से ही टिड्डियों को नियंत्रित करे. अगर सब जगह ऐसा न कर पाए तो कम से कम आबादी के पास के इलाकों, जल स्रोतों के संग्रहण/भंडारण क्षेत्रों में तो रासायनिक उपाय न अपना कर उपरोक्त सुरक्षित उपायों को ही अपनाना चाहिए.

कुछ गैर रासायनिक उपाय निम्नलिखित हैं:

  1. क्योंकि टिड्डी दल न रात को प्रवास करता है न भक्षण करता है अपितु झुण्ड में एक जगह स्थिर रहता है. इस लिए रात को इन को न केवल पकड़ कर इकट्ठा किया जा सकता है अपितु इन से पौष्टिक मुर्गी आहार बना कर मोटी कमाई भी की जा सकती है. इस की आर्थिक एवं भौतिक व्यवहार्यता स्थापित की जा चुकी है. एक रात में एक व्यक्ति 10 क्विंटल तक टिड्डी पकड़ सकता है;
  2. मुर्गीयाँ एवं बतखें टिड्डियों का भक्षण कर के इन के नियंत्रण में सहायक होती हैं;
  3. अलसी के तेल, मीठे सोडे, लहसून, जीरा एवं संतरे इत्यादि के अर्क के मिश्रण से भी 24 घंटे के अन्दर टिड्डियों को ख़त्म किया जा सकता है. इस मिश्रण के प्रयोग का फसलों पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता;
  4. टिड्डियों के जीवन चक्र को समझ कर समय रहते उपाय किये जाएँ तो ऐसे परजीवी फफूंद उपलब्ध हैं जो टिड्डियों को ख़त्म कर सकती हैं;
  5. ऐसे किसी भी छिड़काव से जो वनस्पति पदार्थ को अभक्ष्य बना दे, से भी टिड्डियों को नियंत्रित किया जा सकता है. इस साल पद्मश्री से सम्मानित तेलंगाना के जैविक किसान, चिंताला वेंकट रेड्डी के अनुसार धरती के चार फुट नीचे से (ताकि उस में चिकनी मिट्टी के अंश हों) 30 से 40 किलो मिट्टी ले कर उस को 200 लीटर पानी में अच्छी तरह घोल कर 10-20 मिनट के लिए छोड़ दें एवं तदुपरांत निथरे हुए पानी को छान कर फसल पर छिड़काव करने से फसल टिड्डियों के भक्षण योग्य नहीं रहती. इस रेत वाले पानी को सामान्य स्प्रे पम्प से छिड़का जा सकता है. टिड्डी दल का खतरा टल जाने के बाद सादे पानी से फसल पर छिड़काव करने से रेत की परत को पत्तों से हटाया जा सकता है;
  6. शोर मचा कर, टिड्डी दल के रास्ते में 50 फुट ऊँचे जाल लगा कर या टिड्डियों के झुण्ड के बीच हवाई जहाज उड़ा कर या अन्य किन्ही उपायों से अगर टिड्डी दल को बिखेर दिया जाए तो भी इस का दंश कम किया जा सकता है.

प्रो चौधरी के अनुसार इस बारे में कोई दो राय नहीं है कि टिड्डी दल का हमला एक गंभीर चुनौती है जिस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता परन्तु टिड्डी नियंत्रण के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि टिड्डी नियंत्रण के उपायों से हवा, पानी, वातावरण एवं खाद्य पदार्थ प्रदूषित न हों.

जब कि खतरनाक कीटनाशकों के हवाई छिड़काव के दुष्प्रभावों को वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित किया जा चुका है, यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि सरकार ने इसी साल एक जैविक किसान को पद्मश्री से सम्मानित करने का निर्णय तो लिया है पर इन के ज्ञान को नज़रअंदाज़ कर के केवल घातक रासायनिक उपाय ही अपना रही है.

उपरोक्त उपायों से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए स्रोत:

https://doi.org/10.1007/s10340-019-01169-7

https://www.thethirdpole.net/2020/05/28/huge-swarms-of-locusts-could-be-fed-to-chickens/

https://telanganatoday.com/telanganas-desi-mud-solution-to-check-locusts

Writer: प्रोफेसर राजेन्द्र चौधरी, सलाहकार, क़ुदरती खेती अभियान, हरियाणा, 9416182061

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